بسم الله الرحمن الرحيم

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ترتيب الآيةرقم السورةرقم الآيةالاية
55197424فقال إن هذا إلا سحر يؤثر
फिर कहने लगा ये बस जादू है जो (अगलों से) चला आता है
55207425إن هذا إلا قول البشر
ये तो बस आदमी का कलाम है
55217426سأصليه سقر
(ख़ुदा का नहीं) मैं उसे अनक़रीब जहन्नुम में झोंक दूँगा
55227427وما أدراك ما سقر
और तुम क्या जानों कि जहन्नुम क्या है
55237428لا تبقي ولا تذر
वह न बाक़ी रखेगी न छोड़ देगी
55247429لواحة للبشر
और बदन को जला कर सियाह कर देगी
55257430عليها تسعة عشر
उस पर उन्नीस (फ़रिश्ते मुअय्यन) हैं
55267431وما جعلنا أصحاب النار إلا ملائكة وما جعلنا عدتهم إلا فتنة للذين كفروا ليستيقن الذين أوتوا الكتاب ويزداد الذين آمنوا إيمانا ولا يرتاب الذين أوتوا الكتاب والمؤمنون وليقول الذين في قلوبهم مرض والكافرون ماذا أراد الله بهذا مثلا كذلك يضل الله من يشاء ويهدي من يشاء وما يعلم جنود ربك إلا هو وما هي إلا ذكرى للبشر
और हमने जहन्नुम का निगेहबान तो बस फरिश्तों को बनाया है और उनका ये शुमार भी काफिरों की आज़माइश के लिए मुक़र्रर किया ताकि अहले किताब (फौरन) यक़ीन कर लें और मोमिनो का ईमान और ज्यादा हो और अहले किताब और मोमिनीन (किसी तरह) शक़ न करें और जिन लोगों के दिल में (निफ़ाक का) मर्ज़ है (वह) और काफिर लोग कह बैठे कि इस मसल (के बयान करने) से ख़ुदा का क्या मतलब है यूँ ख़ुदा जिसे चाहता है गुमराही में छोड़ देता है और जिसे चाहता है हिदायत करता है और तुम्हारे परवरदिगार के लशकरों को उसके सिवा कोई नहीं जानता और ये तो आदमियों के लिए बस नसीहत है
55277432كلا والقمر
सुन रखो (हमें) चाँद की क़सम
55287433والليل إذ أدبر
और रात की जब जाने लगे


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