بسم الله الرحمن الرحيم

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802613وله ما سكن في الليل والنهار وهو السميع العليم
हालॉकि (ये नहीं समझते कि) जो कुछ रात को और दिन को (रुए ज़मीन पर) रहता (सहता) है (सब) ख़ास उसी का है और वही (सब की) सुनता (और सब कुछ) जानता है
803614قل أغير الله أتخذ وليا فاطر السماوات والأرض وهو يطعم ولا يطعم قل إني أمرت أن أكون أول من أسلم ولا تكونن من المشركين
ऐ रसूल) तुम कह दो कि क्या ख़ुदा को जो सारे आसमान व ज़मीन का पैदा करने वाला है छोड़ कर दूसरे को (अपना) सरपरस्त बनाओ और वही (सब को) रोज़ी देता है और उसको कोई रोज़ी नहीं देता (ऐ रसूल) तुम कह दो कि मुझे हुक्म दिया गया है कि सब से पहले इस्लाम लाने वाला मैं हूँ और (ये भी कि ख़बरदार) मुशरेकीन से न होना
804615قل إني أخاف إن عصيت ربي عذاب يوم عظيم
(ऐ रसूल) तुम कहो कि अगर मैं नाफरमानी करुँ तो बेशक एक बड़े (सख्त) दिल के अज़ाब से डरता हूँ
805616من يصرف عنه يومئذ فقد رحمه وذلك الفوز المبين
उस दिन जिस (के सर) से अज़ाब टल गया तो (समझो कि) ख़ुदा ने उस पर (बड़ा) रहम किया और यही तो सरीही कामयाबी है
806617وإن يمسسك الله بضر فلا كاشف له إلا هو وإن يمسسك بخير فهو على كل شيء قدير
और अगर ख़ुदा तुम को किसी क़िस्म की तकलीफ पहुचाए तो उसके सिवा कोई उसका दफा करने वाला नहीं है और अगर तुम्हें कुछ फायदा) पहुंचाए तो भी (कोई रोक नहीं सकता क्योंकि) वह हर चीज़ पर क़ादिर है
807618وهو القاهر فوق عباده وهو الحكيم الخبير
वही अपने तमाम बन्दों पर ग़ालिब है और वह वाक़िफकार हकीम है
808619قل أي شيء أكبر شهادة قل الله شهيد بيني وبينكم وأوحي إلي هذا القرآن لأنذركم به ومن بلغ أئنكم لتشهدون أن مع الله آلهة أخرى قل لا أشهد قل إنما هو إله واحد وإنني بريء مما تشركون
(ऐ रसूल) तुम पूछो कि गवाही में सबसे बढ़के कौन चीज़ है तुम खुद ही कह दो कि मेरे और तुम्हारे दरमियान ख़ुदा गवाह है और मेरे पास ये क़ुरान वही के तौर पर इसलिए नाज़िल किया गया ताकि मैं तुम्हें और जिसे (उसकी) ख़बर पहुँचे उसके ज़रिए से डराओ क्या तुम यक़ीनन यह गवाही दे सकते हो कि अल्लाह के साथ और दूसरे माबूद भी हैं (ऐ रसूल) तुम कह दो कि मै तो उसकी गवाही नहीं देता (तुम दिया करो) तुम (उन लोगों से) कहो कि वह तो बस एक ही ख़ुदा है और जिन चीज़ों को तुम (ख़ुदा का) शरीक बनाते हो
809620الذين آتيناهم الكتاب يعرفونه كما يعرفون أبناءهم الذين خسروا أنفسهم فهم لا يؤمنون
मै तो उनसे बेज़र हूँ जिन लोगों को हमने किताब अता फरमाई है (यहूद व नसारा) वह तो जिस तरह अपने बाल बच्चों को पहचानते है उसी तरह उस नबी (मोहम्मद) को भी पहचानते हैं (मगर) जिन लोगों ने अपना आप नुक़सान किया वह तो (किसी तरह) ईमान न लाएंगें
810621ومن أظلم ممن افترى على الله كذبا أو كذب بآياته إنه لا يفلح الظالمون
और जो शख़्श ख़ुदा पर झूठ बोहतान बॉधे या उसकी आयतों को झुठलाए उससे बढ़के ज़ालिम कौन होगा और ज़ालिमों को हरगिज़ नजात न होगी
811622ويوم نحشرهم جميعا ثم نقول للذين أشركوا أين شركاؤكم الذين كنتم تزعمون
और (उस दिन को याद करो) जिस दिन हम उन सबको जमा करेंगे फिर जिन लोगों ने शिर्क किया उनसे पूछेगें कि जिनको तुम (ख़ुदा का) शरीक ख्याल करते थे कहाँ हैं


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