بسم الله الرحمن الرحيم

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ترتيب الآيةرقم السورةرقم الآيةالاية
54697222قل إني لن يجيرني من الله أحد ولن أجد من دونه ملتحدا
(ये भी) कह दो कि मुझे ख़ुदा (के अज़ाब) से कोई भी पनाह नहीं दे सकता और न मैं उसके सिवा कहीं पनाह की जगह देखता हूँ
54707223إلا بلاغا من الله ورسالاته ومن يعص الله ورسوله فإن له نار جهنم خالدين فيها أبدا
ख़ुदा की तरफ से (एहकाम के) पहुँचा देने और उसके पैग़ामों के सिवा (कुछ नहीं कर सकता) और जिसने ख़ुदा और उसके रसूल की नाफरमानी की तो उसके लिए यक़ीनन जहन्नुम की आग है जिसमें वह हमेशा और अबादुल आबाद तक रहेगा
54717224حتى إذا رأوا ما يوعدون فسيعلمون من أضعف ناصرا وأقل عددا
यहाँ तक कि जब ये लोग उन चीज़ों को देख लेंगे जिनका उनसे वायदा किया जाता है तो उनको मालूम हो जाएगा कि किसके मददगार कमज़ोर और किसका शुमार कम है
54727225قل إن أدري أقريب ما توعدون أم يجعل له ربي أمدا
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि मैं नहीं जानता कि जिस दिन का तुमसे वायदा किया जाता है क़रीब है या मेरे परवरदिगार ने उसकी मुद्दत दराज़ कर दी है
54737226عالم الغيب فلا يظهر على غيبه أحدا
(वही) ग़ैबवॉ है और अपनी ग़ैब की बाते किसी पर ज़ाहिर नहीं करता
54747227إلا من ارتضى من رسول فإنه يسلك من بين يديه ومن خلفه رصدا
मगर जिस पैग़म्बर को पसन्द फरमाए तो उसके आगे और पीछे निगेहबान फरिश्ते मुक़र्रर कर देता है
54757228ليعلم أن قد أبلغوا رسالات ربهم وأحاط بما لديهم وأحصى كل شيء عددا
ताकि देख ले कि उन्होंने अपने परवरदिगार के पैग़ामात पहुँचा दिए और (यूँ तो) जो कुछ उनके पास है वह सब पर हावी है और उसने तो एक एक चीज़ गिन रखी हैं
5476731بسم الله الرحمن الرحيم يا أيها المزمل
ऐ (मेरे) चादर लपेटे रसूल
5477732قم الليل إلا قليلا
रात को (नमाज़ के वास्ते) खड़े रहो मगर (पूरी रात नहीं)
5478733نصفه أو انقص منه قليلا
थोड़ी रात या आधी रात या इससे भी कुछ कम कर दो या उससे कुछ बढ़ा दो


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