بسم الله الرحمن الرحيم

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ترتيب الآيةرقم السورةرقم الآيةالاية
54597212وأنا ظننا أن لن نعجز الله في الأرض ولن نعجزه هربا
और ये कि हम समझते थे कि हम ज़मीन में (रह कर) ख़ुदा को हरगिज़ हरा नहीं सकते हैं और न भाग कर उसको आजिज़ कर सकते हैं
54607213وأنا لما سمعنا الهدى آمنا به فمن يؤمن بربه فلا يخاف بخسا ولا رهقا
और ये कि जब हमने हिदायत (की किताब) सुनी तो उन पर ईमान लाए तो जो शख़्श अपने परवरदिगार पर ईमान लाएगा तो उसको न नुक़सान का ख़ौफ़ है और न ज़ुल्म का
54617214وأنا منا المسلمون ومنا القاسطون فمن أسلم فأولئك تحروا رشدا
और ये कि हम में से कुछ लोग तो फ़रमाबरदार हैं और कुछ लोग नाफ़रमान तो जो लोग फ़रमाबरदार हैं तो वह सीधे रास्ते पर चलें और रहें
54627215وأما القاسطون فكانوا لجهنم حطبا
नाफरमान तो वह जहन्नुम के कुन्दे बने
54637216وأن لو استقاموا على الطريقة لأسقيناهم ماء غدقا
और (ऐ रसूल तुम कह दो) कि अगर ये लोग सीधी राह पर क़ायम रहते तो हम ज़रूर उनको अलग़ारों पानी से सेराब करते
54647217لنفتنهم فيه ومن يعرض عن ذكر ربه يسلكه عذابا صعدا
ताकि उससे उनकी आज़माईश करें और जो शख़्श अपने परवरदिगार की याद से मुँह मोड़ेगा तो वह उसको सख्त अज़ाब में झोंक देगा
54657218وأن المساجد لله فلا تدعوا مع الله أحدا
और ये कि मस्जिदें ख़ास ख़ुदा की हैं तो लोगों ख़ुदा के साथ किसी की इबादन न करना
54667219وأنه لما قام عبد الله يدعوه كادوا يكونون عليه لبدا
और ये कि जब उसका बन्दा (मोहम्मद) उसकी इबादत को खड़ा होता है तो लोग उसके गिर्द हुजूम करके गिर पड़ते हैं
54677220قل إنما أدعو ربي ولا أشرك به أحدا
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि मैं तो अपने परवरदिगार की इबादत करता हूँ और उसका किसी को शरीक नहीं बनाता
54687221قل إني لا أملك لكم ضرا ولا رشدا
(ये भी) कह दो कि मैं तुम्हारे हक़ में न बुराई ही का एख्तेयार रखता हूँ और न भलाई का


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