بسم الله الرحمن الرحيم

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ترتيب الآيةرقم السورةرقم الآيةالاية
54397120لتسلكوا منها سبلا فجاجا
ताकि तुम उसके बड़े बड़े कुशादा रास्तों में चलो फिरो
54407121قال نوح رب إنهم عصوني واتبعوا من لم يزده ماله وولده إلا خسارا
(फिर) नूह ने अर्ज़ की परवरदिगार इन लोगों ने मेरी नाफ़रमानी की उस शख़्श के ताबेदार बन के जिसने उनके माल और औलाद में नुक़सान के सिवा फ़ायदा न पहुँचाया
54417122ومكروا مكرا كبارا
और उन्होंने (मेरे साथ) बड़ी मक्कारियाँ की
54427123وقالوا لا تذرن آلهتكم ولا تذرن ودا ولا سواعا ولا يغوث ويعوق ونسرا
और (उलटे) कहने लगे कि आपने माबूदों को हरगिज़ न छोड़ना और न वद को और सुआ को और न यगूस और यऊक़ व नस्र को छोड़ना
54437124وقد أضلوا كثيرا ولا تزد الظالمين إلا ضلالا
और उन्होंने बहुतेरों को गुमराह कर छोड़ा और तू (उन) ज़ालिमों की गुमराही को और बढ़ा दे
54447125مما خطيئاتهم أغرقوا فأدخلوا نارا فلم يجدوا لهم من دون الله أنصارا
(आख़िर) वह अपने गुनाहों की बदौलत (पहले तो) डुबाए गए फिर जहन्नुम में झोंके गए तो उन लोगों ने ख़ुदा के सिवा किसी को अपना मददगार न पाया
54457126وقال نوح رب لا تذر على الأرض من الكافرين ديارا
और नूह ने अर्ज़ की परवरदिगार (इन) काफ़िरों में रूए ज़मीन पर किसी को बसा हुआ न रहने दे
54467127إنك إن تذرهم يضلوا عبادك ولا يلدوا إلا فاجرا كفارا
क्योंकि अगर तू उनको छोड़ देगा तो ये (फिर) तेरे बन्दों को गुमराह करेंगे और उनकी औलाद भी गुनाहगार और कट्टी काफिर ही होगी
54477128رب اغفر لي ولوالدي ولمن دخل بيتي مؤمنا وللمؤمنين والمؤمنات ولا تزد الظالمين إلا تبارا
परवरदिगार मुझको और मेरे माँ बाप को और जो मोमिन मेरे घर में आए उनको और तमाम ईमानदार मर्दों और मोमिन औरतों को बख्श दे और (इन) ज़ालिमों की बस तबाही को और ज्यादा कर
5448721بسم الله الرحمن الرحيم قل أوحي إلي أنه استمع نفر من الجن فقالوا إنا سمعنا قرآنا عجبا
(ऐ रसूल लोगों से) कह दो कि मेरे पास 'वही' आयी है कि जिनों की एक जमाअत ने (क़ुरान को) जी लगाकर सुना तो कहने लगे कि हमने एक अजीब क़ुरान सुना है


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