بسم الله الرحمن الرحيم

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52696728قل أرأيتم إن أهلكني الله ومن معي أو رحمنا فمن يجير الكافرين من عذاب أليم
(ऐ रसूल) तुम कह दो भला देखो तो कि अगर ख़ुदा मुझको और मेरे साथियों को हलाक कर दे या हम पर रहम फरमाए तो काफ़िरों को दर्दनाक अज़ाब से कौन पनाह देगा
52706729قل هو الرحمن آمنا به وعليه توكلنا فستعلمون من هو في ضلال مبين
तुम कह दो कि वही (ख़ुदा) बड़ा रहम करने वाला है जिस पर हम ईमान लाए हैं और हमने तो उसी पर भरोसा कर लिया है तो अनक़रीब ही तुम्हें मालूम हो जाएगा कि कौन सरीही गुमराही में (पड़ा) है
52716730قل أرأيتم إن أصبح ماؤكم غورا فمن يأتيكم بماء معين
ऐ रसूल तुम कह दो कि भला देखो तो कि अगर तुम्हारा पानी ज़मीन के अन्दर चला जाए कौन ऐसा है जो तुम्हारे लिए पानी का चश्मा बहा लाए
5272681بسم الله الرحمن الرحيم ن والقلم وما يسطرون
नून क़लम की और उस चीज़ की जो लिखती हैं (उसकी) क़सम है
5273682ما أنت بنعمة ربك بمجنون
कि तुम अपने परवरदिगार के फ़ज़ल (व करम) से दीवाने नहीं हो
5274683وإن لك لأجرا غير ممنون
और तुम्हारे वास्ते यक़ीनन वह अज्र है जो कभी ख़त्म ही न होगा
5275684وإنك لعلى خلق عظيم
और बेशक तुम्हारे एख़लाक़ बड़े आला दर्जे के हैं
5276685فستبصر ويبصرون
तो अनक़रीब ही तुम भी देखोगे और ये कुफ्फ़ार भी देख लेंगे
5277686بأييكم المفتون
कि तुममें दीवाना कौन है
5278687إن ربك هو أعلم بمن ضل عن سبيله وهو أعلم بالمهتدين
बेशक तुम्हारा परवरदिगार इनसे ख़ूब वाक़िफ़ है जो उसकी राह से भटके हुए हैं और वही हिदायत याफ्ता लोगों को भी ख़ूब जानता है


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