بسم الله الرحمن الرحيم

نتائج البحث: 6236
ترتيب الآيةرقم السورةرقم الآيةالاية
41684035الذين يجادلون في آيات الله بغير سلطان أتاهم كبر مقتا عند الله وعند الذين آمنوا كذلك يطبع الله على كل قلب متكبر جبار
ऐसे लोगो को (गुमराही में डालता है) जो अल्लाह की आयतों में झगड़ते है, बिना इसके कि उनके पास कोई प्रमाण आया हो, अल्लाह की दृष्टि) में और उन लोगों की दृष्टि में जो ईमान लाए यह (बात) अत्यन्त अप्रिय है। इसी प्रकार अल्लाह हर अहंकारी, निर्दय- अत्याचारी के दिल पर मुहर लगा देता है। -
41694036وقال فرعون يا هامان ابن لي صرحا لعلي أبلغ الأسباب
फ़िरऔन ने कहा, "ऐ हामान! मेरे एक उच्च भवन बना, ताकि मैं साधनों तक पहुँच सकूँ,
41704037أسباب السماوات فأطلع إلى إله موسى وإني لأظنه كاذبا وكذلك زين لفرعون سوء عمله وصد عن السبيل وما كيد فرعون إلا في تباب
आकाशों को साधनों (और क्षत्रों) तक। फिर मूसा के पूज्य को झाँककर देखूँ। मैं तो उसे झूठा ही समझता हूँ।" इस प्रकार फ़िरऔन को लिए उसका दुष्कर्म सुहाना बना दिया गया और उसे मार्ग से रोक दिया गया। फ़िरऔन की चाल तो बस तबाही के सिलसिले में रही
41714038وقال الذي آمن يا قوم اتبعون أهدكم سبيل الرشاد
उस व्यक्ति ने, जो ईमान लाया था, कहा, "ऐ मेरी क़ौम के लोगो! मेरा अनुसरण करो, मैं तुम्हे भलाई का ठीक रास्ता दिखाऊँगा
41724039يا قوم إنما هذه الحياة الدنيا متاع وإن الآخرة هي دار القرار
ऐ मेरी क़ौम के लोगो! यह सांसारिक जीवन तो बस अस्थायी उपभोग है। निश्चय ही स्थायी रूप से ठहरनेका घर तो आख़िरत ही है
41734040من عمل سيئة فلا يجزى إلا مثلها ومن عمل صالحا من ذكر أو أنثى وهو مؤمن فأولئك يدخلون الجنة يرزقون فيها بغير حساب
जिस किसी ने बुराई की तो उसे वैसा ही बदला मिलेगा, किन्तु जिस किसी ने अच्छा कर्म किया, चाहे वह पुरुष हो या स्त्री, किन्तु हो वह मोमिन, तो ऐसे लोग जन्नत में प्रवेश करेंगे। वहाँ उन्हें बेहिसाब दिया जाएगा
41744041ويا قوم ما لي أدعوكم إلى النجاة وتدعونني إلى النار
ऐ मेरी क़ौम के लोगो! यह मेरे साथ क्या मामला है कि मैं तो तुम्हें मुक्ति की ओर बुलाता हूँ और तुम मुझे आग की ओर बुला रहे हो?
41754042تدعونني لأكفر بالله وأشرك به ما ليس لي به علم وأنا أدعوكم إلى العزيز الغفار
तुम मुझे बुला रहे हो कि मैं अल्लाह के साथ कुफ़्र करूँ और उसके साथ उसे साझी ठहराऊँ जिसका मुझे कोई ज्ञान नहीं, जबकि मैं तुम्हें बुला रहा हूँ उसकी ओर जो प्रभुत्वशाली, अत्यन्त क्षमाशील है
41764043لا جرم أنما تدعونني إليه ليس له دعوة في الدنيا ولا في الآخرة وأن مردنا إلى الله وأن المسرفين هم أصحاب النار
निस्संदेह तुम मुझे जिसकी ओर बुलाते हो उसके लिए न संसार में आमंत्रण है और न आख़िरत (परलोक) में और यह की हमें लौटना भी अल्लाह ही की ओर है और यह कि जो मर्यादाही है, वही आग (में पड़नेवाले) वाले है
41774044فستذكرون ما أقول لكم وأفوض أمري إلى الله إن الله بصير بالعباد
अतः शीघ्र ही तुम याद करोगे, जो कुछ मैं तुमसे कह रहा हूँ। मैं तो अपना मामला अल्लाह को सौंपता हूँ। निस्संदेह अल्लाह की दृष्टि सब बन्दों पर है


0 ... 406.7 407.7 408.7 409.7 410.7 411.7 412.7 413.7 414.7 415.7 417.7 418.7 419.7 420.7 421.7 422.7 423.7 424.7 425.7 ... 623

إنتاج هذه المادة أخد: 0.02 ثانية


المغرب.كووم © ٢٠٠٩ - ١٤٣٠ © الحـمـد لله الـذي سـخـر لـنا هـذا :: وقف لله تعالى وصدقة جارية

4310153955034510533954655506278150802370