بسم الله الرحمن الرحيم

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33012849قل فأتوا بكتاب من عند الله هو أهدى منهما أتبعه إن كنتم صادقين
कहो, "अच्छा तो लाओ अल्लाह के यहाँ से कोई ऐसी किताब, जो इन दोनों से बढ़कर मार्गदर्शन करनेवाली हो कि मैं उसका अनुसरण करूँ, यदि तुम सच्चे हो?"
33022850فإن لم يستجيبوا لك فاعلم أنما يتبعون أهواءهم ومن أضل ممن اتبع هواه بغير هدى من الله إن الله لا يهدي القوم الظالمين
अब यदि वे तुम्हारी माँग पूरी न करें तो जान लो कि वे केवल अपनी इच्छाओं के पीछे चलते है। और उस व्यक्ति से बढ़कर भटका हुआ कौन होगा जो अल्लाह की ओर से किसी मार्गदर्शन के बिना अपनी इच्छा पर चले? निश्चय ही अल्लाह ज़ालिम लोगों को मार्ग नहीं दिखाता
33032851ولقد وصلنا لهم القول لعلهم يتذكرون
और हम उनके लिए वाणी बराबर अवतरित करते रहे, शायद वे ध्यान दें
33042852الذين آتيناهم الكتاب من قبله هم به يؤمنون
जिन लोगों को हमने इससे पूर्व किताब दी थी, वे इसपर ईमान लाते है
33052853وإذا يتلى عليهم قالوا آمنا به إنه الحق من ربنا إنا كنا من قبله مسلمين
और जब यह उनको पढ़कर सुनाया जाता है तो वे कहते है, "हम इसपर ईमान लाए। निश्चय ही यह सत्य है हमारे रब की ओर से। हम तो इससे पहले ही से मुस्लिम (आज्ञाकारी) हैं।"
33062854أولئك يؤتون أجرهم مرتين بما صبروا ويدرءون بالحسنة السيئة ومما رزقناهم ينفقون
ये वे लोग है जिन्हें उनका प्रतिदान दुगना दिया जाएगा, क्योंकि वे जमे रहे और भलाई के द्वारा बुराई को दूर करते है और जो कुछ रोज़ी हमने उन्हें दी हैं, उसमें से ख़र्च करते है
33072855وإذا سمعوا اللغو أعرضوا عنه وقالوا لنا أعمالنا ولكم أعمالكم سلام عليكم لا نبتغي الجاهلين
और जब वे व्यर्थ की बात सुनते है तो यह कहते हुए उससे किनारा खींच लेते है कि "हमारे लिए हमारे कर्म है और तुम्हारे लिए तुम्हारे कर्म है। तुमको सलाम है! ज़ाहिलों को हम नहीं चाहते।"
33082856إنك لا تهدي من أحببت ولكن الله يهدي من يشاء وهو أعلم بالمهتدين
तुम जिसे चाहो राह पर नहीं ला सकते, किन्तु अल्लाह जिसे चाहता है राह दिखाता है, और वही राह पानेवालों को भली-भाँति जानता है
33092857وقالوا إن نتبع الهدى معك نتخطف من أرضنا أولم نمكن لهم حرما آمنا يجبى إليه ثمرات كل شيء رزقا من لدنا ولكن أكثرهم لا يعلمون
वे कहते है, "यदि हम तुम्हारे साथ इस मार्गदर्शन का अनुसरण करें तो अपने भू-भाग से उचक लिए जाएँगे।" क्या ख़तरों से सुरक्षित हरम में हमने ठिकाना नहीं दिया, जिसकी ओर हमारी ओर से रोज़ी के रूप में हर चीज़ की पैदावार खिंची चली आती है? किन्तु उनमें से अधिकतर जानते नहीं
33102858وكم أهلكنا من قرية بطرت معيشتها فتلك مساكنهم لم تسكن من بعدهم إلا قليلا وكنا نحن الوارثين
हमने कितनी ही बस्तियों को विनष्ट कर डाला, जिन्होंने अपनी गुज़र-बसर के संसाधन पर इतराते हुए अकृतज्ञता दिखाई। तो वे है उनके घर, जो उनके बाद आबाद थोड़े ही हुए। अन्ततः हम ही वारिस हुए


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