بسم الله الرحمن الرحيم

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ترتيب الآيةرقم السورةرقم الآيةالاية
30292697تالله إن كنا لفي ضلال مبين
ख़ुदा की क़सम हम लोग तो यक़ीनन सरीही गुमराही में थे
30302698إذ نسويكم برب العالمين
कि हम तुम को सारे जहाँन के पालने वाले (ख़ुदा) के बराबर समझते रहे
30312699وما أضلنا إلا المجرمون
और हमको बस (उन) गुनाहगारों ने (जो मुझसे पहले हुए) गुमराह किया
303226100فما لنا من شافعين
तो अब तो न कोई (साहब) मेरी सिफारिश करने वाले हैं
303326101ولا صديق حميم
और न कोई दिलबन्द दोस्त हैं
303426102فلو أن لنا كرة فنكون من المؤمنين
तो काश हमें अब दुनिया में दोबारा जाने का मौक़ा मिलता तो हम (ज़रुर) ईमान वालों से होते
303526103إن في ذلك لآية وما كان أكثرهم مؤمنين
इबराहीम के इस किस्से में भी यक़ीनन एक बड़ी इबरत है और इनमें से अक्सर ईमान लाने वाले थे भी नहीं
303626104وإن ربك لهو العزيز الرحيم
और इसमे तो शक ही नहीं कि तुम्हारा परवरदिगार (सब पर) ग़ालिब और बड़ा मेहरबान है
303726105كذبت قوم نوح المرسلين
(यूँ ही) नूह की क़ौम ने पैग़म्बरो को झुठलाया
303826106إذ قال لهم أخوهم نوح ألا تتقون
कि जब उनसे उन के भाई नूह ने कहा कि तुम लोग (ख़ुदा से) क्यों नहीं डरते मै तो तुम्हारा यक़ीनी अमानत दार पैग़म्बर हूँ


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