بسم الله الرحمن الرحيم

نتائج البحث: 6236
ترتيب الآيةرقم السورةرقم الآيةالاية
25512168قالوا حرقوه وانصروا آلهتكم إن كنتم فاعلين
उन्होंने कहा, "जला दो उसे, और सहायक हो अपने देवताओं के, यदि तुम्हें कुछ करना है।"
25522169قلنا يا نار كوني بردا وسلاما على إبراهيم
हमने कहा, "ऐ आग! ठंड़ी हो जा और सलामती बन जा इबराहीम पर!"
25532170وأرادوا به كيدا فجعلناهم الأخسرين
उन्होंने उसके साथ एक चाल चलनी चाही, किन्तु हमने उन्हीं को घाटे में डाल दिया
25542171ونجيناه ولوطا إلى الأرض التي باركنا فيها للعالمين
और हम उसे और लूत को बचाकर उस भूभाग की ओर निकाल ले गए, जिसमें हमने दुनियावालों के लिए बरकतें रखी थीं
25552172ووهبنا له إسحاق ويعقوب نافلة وكلا جعلنا صالحين
और हमने उसे इसहाक़ प्रदान किया और तदधिक याक़ूब भी। और प्रत्येक को हमने नेक बनाया
25562173وجعلناهم أئمة يهدون بأمرنا وأوحينا إليهم فعل الخيرات وإقام الصلاة وإيتاء الزكاة وكانوا لنا عابدين
और हमने उन्हें नायक बनाया कि वे हमारे आदेश से मार्ग दिखाते थे और हमने उनकी ओर नेक कामों के करने और नमाज़ की पाबन्दी करने और ज़कात देने की प्रकाशना की, और वे हमारी बन्दगी में लगे हुए थे
25572174ولوطا آتيناه حكما وعلما ونجيناه من القرية التي كانت تعمل الخبائث إنهم كانوا قوم سوء فاسقين
और रहा लूत तो उसे हमने निर्णय-शक्ति और ज्ञान प्रदान किया और उसे उस बस्ती से छुटकारा दिया जो गन्दे कर्म करती थी। वास्तव में वह बहुत ही बुरी और अवज्ञाकारी क़ौम थी
25582175وأدخلناه في رحمتنا إنه من الصالحين
और उसको हमने अपनी दयालुता में प्रवेश कराया। निस्संदेह वह अच्छे लोगों में से था
25592176ونوحا إذ نادى من قبل فاستجبنا له فنجيناه وأهله من الكرب العظيم
और नूह की भी चर्चा करो, जबकि उसने इससे पहले हमें पुकारा था, तो हमने उसकी सुन ली और हमने उसे और उसके लोगों को बड़े क्लेश से छुटकारा दिया
25602177ونصرناه من القوم الذين كذبوا بآياتنا إنهم كانوا قوم سوء فأغرقناهم أجمعين
औऱ उस क़ौम के मुक़ाबले में जिसने हमारी आयतों को झुठला दिया था, हमने उसकी सहायता की। वास्तव में वे बुरे लोग थे। अतः हमने उन सबको डूबो दिया


0 ... 245 246 247 248 249 250 251 252 253 254 256 257 258 259 260 261 262 263 264 ... 623

إنتاج هذه المادة أخد: 0.02 ثانية


المغرب.كووم © ٢٠٠٩ - ١٤٣٠ © الحـمـد لله الـذي سـخـر لـنا هـذا :: وقف لله تعالى وصدقة جارية

41615438601946651237331589024468695195