بسم الله الرحمن الرحيم

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ترتيب الآيةرقم السورةرقم الآيةالاية
43234251وما كان لبشر أن يكلمه الله إلا وحيا أو من وراء حجاب أو يرسل رسولا فيوحي بإذنه ما يشاء إنه علي حكيم
और किसी आदमी के लिए ये मुमकिन नहीं कि ख़ुदा उससे बात करे मगर वही के ज़रिए से (जैसे) (दाऊद) परदे के पीछे से जैसे (मूसा) या कोई फ़रिश्ता भेज दे (जैसे मोहम्मद) ग़रज़ वह अपने एख्तेयार से जो चाहता है पैग़ाम भेज देता है बेशक वह आलीशान हिकमत वाला है
43244252وكذلك أوحينا إليك روحا من أمرنا ما كنت تدري ما الكتاب ولا الإيمان ولكن جعلناه نورا نهدي به من نشاء من عبادنا وإنك لتهدي إلى صراط مستقيم
और इसी तरह हमने अपने हुक्म को रूह (क़ुरान) तुम्हारी तरफ 'वही' के ज़रिए से भेजे तो तुम न किताब ही को जानते थे कि क्या है और न ईमान को मगर इस (क़ुरान) को एक नूर बनाया है कि इससे हम अपने बन्दों में से जिसकी चाहते हैं हिदायत करते हैं और इसमें शक़ नहीं कि तुम (ऐ रसूल) सीधा ही रास्ता दिखाते हो
43254253صراط الله الذي له ما في السماوات وما في الأرض ألا إلى الله تصير الأمور
(यानि) उसका रास्ता कि जो आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है (ग़रज़ सब कुछ) उसी का है सुन रखो सब काम ख़ुदा ही की तरफ रूजू होंगे और वही फैसला करेगा
4326431بسم الله الرحمن الرحيم حم
हा मीम
4327432والكتاب المبين
रौशन किताब (क़ुरान) की क़सम
4328433إنا جعلناه قرآنا عربيا لعلكم تعقلون
हमने इस किताब को अरबी ज़बान कुरान ज़रूर बनाया है ताकि तुम समझो
4329434وإنه في أم الكتاب لدينا لعلي حكيم
और बेशक ये (क़ुरान) असली किताब (लौह महफूज़) में (भी जो) मेरे पास है लिखी हुई है (और) यक़ीनन बड़े रूतबे की (और) पुरअज़ हिकमत है
4330435أفنضرب عنكم الذكر صفحا أن كنتم قوما مسرفين
भला इस वजह से कि तुम ज्यादती करने वाले लोग हो हम तुमको नसीहत करने से मुँह मोड़ेंगे (हरगिज़ नहीं)
4331436وكم أرسلنا من نبي في الأولين
और हमने अगले लोगों को बहुत से पैग़म्बर भेजे थे
4332437وما يأتيهم من نبي إلا كانوا به يستهزئون
और कोई पैग़म्बर उनके पास ऐसा नहीं आया जिससे इन लोगों ने ठट्ठे नहीं किए हो


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