بسم الله الرحمن الرحيم

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36773517وما ذلك على الله بعزيز
और यह अल्लाह के लिए कुछ भी कठिन नहीं
36783518ولا تزر وازرة وزر أخرى وإن تدع مثقلة إلى حملها لا يحمل منه شيء ولو كان ذا قربى إنما تنذر الذين يخشون ربهم بالغيب وأقاموا الصلاة ومن تزكى فإنما يتزكى لنفسه وإلى الله المصير
कोई बोझ उठानेवाला किसी दूसरे का बोझ न उठाएगा। और यदि कोई कोई से दबा हुआ व्यक्ति अपना बोझ उठाने के लिए पुकारे तो उसमें से कुछ भी न उठाया, यद्यपि वह निकट का सम्बन्धी ही क्यों न हो। तुम तो केवल सावधान कर रहे हो। जो परोक्ष में रहते हुए अपने रब से डरते हैं और नमाज़ के पाबन्द हो चुके है (उनकी आत्मा का विकास हो गया) । और जिसने स्वयं को विकसित किया वह अपने ही भले के लिए अपने आपको विकसित करेगा। और पलटकर जाना तो अल्लाह ही की ओर है
36793519وما يستوي الأعمى والبصير
अंधा और आँखोंवाला बराबर नहीं,
36803520ولا الظلمات ولا النور
और न अँधेरे और प्रकाश,
36813521ولا الظل ولا الحرور
और न छाया और धूप
36823522وما يستوي الأحياء ولا الأموات إن الله يسمع من يشاء وما أنت بمسمع من في القبور
और न जीवित और मृत बराबर है। निश्चय ही अल्लाह जिसे चाहता है सुनाता है। तुम उन लोगों को नहीं सुना सकते, जो क़ब्रों में हो।
36833523إن أنت إلا نذير
तुम तो बस एक सचेतकर्ता हो
36843524إنا أرسلناك بالحق بشيرا ونذيرا وإن من أمة إلا خلا فيها نذير
हमने तुम्हें सत्य के साथ भेजा है, शुभ-सूचना देनेवाला और सचेतकर्ता बनाकर। और जो भी समुदाय गुज़रा है, उसमें अनिवार्यतः एक सचेतकर्ता हुआ है
36853525وإن يكذبوك فقد كذب الذين من قبلهم جاءتهم رسلهم بالبينات وبالزبر وبالكتاب المنير
यदि वे तुम्हें झुठलाते है तो जो उनसे पहले थे वे भी झुठला चुके है। उनके रसूल उनके पास स्पष्ट और ज़बूरें और प्रकाशमान किताब लेकर आए थे
36863526ثم أخذت الذين كفروا فكيف كان نكير
फिर मैं उन लोगों को, जिन्होंने इनकार किया, पकड़ लिया (तो फिर कैसा रहा मेरा इनकार!)


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