بسم الله الرحمن الرحيم

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ترتيب الآيةرقم السورةرقم الآيةالاية
19681667ومن ثمرات النخيل والأعناب تتخذون منه سكرا ورزقا حسنا إن في ذلك لآية لقوم يعقلون
और खजूरों और अंगूरों के फलों से भी, जिससे तुम मादक चीज़ भी तैयार कर लेते हो और अच्छी रोज़ी भी। निश्चय ही इसमें बुद्धि से काम लेनेवाले लोगों के लिए एक बड़ी निशानी है
19691668وأوحى ربك إلى النحل أن اتخذي من الجبال بيوتا ومن الشجر ومما يعرشون
और तुम्हारे रब ने मुधमक्खी के जी में यह बात डाल दी कि "पहाड़ों में और वृक्षों में और लोगों के बनाए हुए छत्रों में घर बना
19701669ثم كلي من كل الثمرات فاسلكي سبل ربك ذللا يخرج من بطونها شراب مختلف ألوانه فيه شفاء للناس إن في ذلك لآية لقوم يتفكرون
फिर हर प्रकार के फल-फूलों से ख़ुराक ले और अपने रब के समतम मार्गों पर चलती रह।" उसके पेट से विभिन्न रंग का एक पेय निकलता है, जिसमें लोगों के लिए आरोग्य है। निश्चय ही सोच-विचार करनेवाले लोगों के लिए इसमें एक बड़ी निशानी है
19711670والله خلقكم ثم يتوفاكم ومنكم من يرد إلى أرذل العمر لكي لا يعلم بعد علم شيئا إن الله عليم قدير
अल्लाह ने तुम्हें पैदा किया। फिर वह तुम्हारी आत्माओं को ग्रस्त कर लेता है और तुममें से कोई (बुढापे की) निकृष्ट तम अवस्था की ओर फिर जाता है, कि (परिणामस्वरूप) जानने के पश्चात फिर वह कुछ न जाने। निस्संदेह अल्लाह सर्वज्ञ, बड़ा सामर्थ्यवान है
19721671والله فضل بعضكم على بعض في الرزق فما الذين فضلوا برادي رزقهم على ما ملكت أيمانهم فهم فيه سواء أفبنعمة الله يجحدون
और अल्लाह ने तुममें से किसी को किसी पर रोज़ी में बड़ाई दी है। किन्तु जिनको बड़ाई दी गई है वे ऐसे नहीं है कि अपनी रोज़ी उनकी ओर फेर दिया करते हों, जो उनके क़ब्ज़े में है कि वे सब इसमें बराबर हो जाएँ। फिर क्या अल्लाह के अनुग्रह का उन्हें इनकार है?
19731672والله جعل لكم من أنفسكم أزواجا وجعل لكم من أزواجكم بنين وحفدة ورزقكم من الطيبات أفبالباطل يؤمنون وبنعمت الله هم يكفرون
और अल्लाह ही ने तुम्हारे लिए तुम्हारी सहजाति पत्नियों बनाई और तुम्हारी पत्नियों से तुम्हारे लिए पुत्र और पौत्र पैदा किए और तुम्हे अच्छी पाक चीज़ों की रोज़ी प्रदान की; तो क्या वे मिथ्या को मानते है और अल्लाह के अनुग्रह ही का उन्हें इनकार है?
19741673ويعبدون من دون الله ما لا يملك لهم رزقا من السماوات والأرض شيئا ولا يستطيعون
और अल्लाह से हटकर उन्हें पूजते है, जिन्हें आकाशों और धरती से रोज़ी प्रदान करने का कुछ भी अधिकार प्राप्त नहीं है और न उन्हें कोई सामर्थ्य ही प्राप्त है
19751674فلا تضربوا لله الأمثال إن الله يعلم وأنتم لا تعلمون
अतः अल्लाह के लिए मिसालें न घड़ो। जानता अल्लाह है, तुम नहीं जानते
19761675ضرب الله مثلا عبدا مملوكا لا يقدر على شيء ومن رزقناه منا رزقا حسنا فهو ينفق منه سرا وجهرا هل يستوون الحمد لله بل أكثرهم لا يعلمون
अल्लाह ने एक मिसाल पेश की है: एक ग़ुलाम है, जिसपर दूसरे का अधिकार है, उसे किसी चीज़ पर अधिकार प्राप्त नहीं। इसके विपरीत एक वह व्यक्ति है, जिसे हमने अपनी ओर से अच्छी रोज़ी प्रदान की है, फिर वह उसमें से खुले और छिपे ख़र्च करता है। तो क्या वे परस्पर समान है? प्रशंसा अल्लाह के लिए है! किन्तु उनमें अधिकतर लोग जानते नहीं
19771676وضرب الله مثلا رجلين أحدهما أبكم لا يقدر على شيء وهو كل على مولاه أينما يوجهه لا يأت بخير هل يستوي هو ومن يأمر بالعدل وهو على صراط مستقيم
अल्लाह ने एक और मिसाल पेश की है: दो व्यक्ति है। उनमें से एक गूँगा है। किसी चीज़ पर उसे अधिकार प्राप्त नहीं। वह अपने स्वामी पर एक बोझ है - उसे वह जहाँ भेजता है, कुछ भला करके नहीं लाता। क्या वह और जो न्याय का आदेश देता है और स्वयं भी सीधे मार्ग पर है वह, समान हो सकते है?


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