بسم الله الرحمن الرحيم

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19481647أو يأخذهم على تخوف فإن ربكم لرءوف رحيم
क्या अल्लाह की पैदा की हुई किसी चीज़ को उन्होंने देखा नहीं कि किस प्रकार उसकी परछाइयाँ अल्लाह को सजदा करती और विनम्रता दिखाती हुई दाएँ और बाएँ ढलती है?
19491648أولم يروا إلى ما خلق الله من شيء يتفيأ ظلاله عن اليمين والشمائل سجدا لله وهم داخرون
या वह उन्हें त्रस्त अवस्था में पकड़ ले? किन्तु तुम्हारा रब तो बड़ा ही करुणामय, दयावान है
19501649ولله يسجد ما في السماوات وما في الأرض من دابة والملائكة وهم لا يستكبرون
और आकाशों और धरती में जितने भी जीवधारी है वे सब अल्लाह ही को सजदा करते है और फ़रिश्ते भी और वे घमंड बिलकुल नहीं करते
19511650يخافون ربهم من فوقهم ويفعلون ما يؤمرون
अपने ऊपर से अपने रब का डर रखते है और जो उन्हें आदेश होता है, वही करते है
19521651وقال الله لا تتخذوا إلهين اثنين إنما هو إله واحد فإياي فارهبون
अल्लाह का फ़रमान है, "दो-दो पूज्य-प्रभु न बनाओ, वह तो बस अकेला पूज्य-प्रभु है। अतः मुझी से डरो।"
19531652وله ما في السماوات والأرض وله الدين واصبا أفغير الله تتقون
जो कुछ आकाशों और धरती में है सब उसी का है। उसी का दीन (धर्म) स्थायी और अनिवार्य है। फिर क्या अल्लाह के सिवा तुम किसी और का डर रखोगे?
19541653وما بكم من نعمة فمن الله ثم إذا مسكم الضر فإليه تجأرون
तुम्हारे पास जो भी नेमत है वह अल्लाह ही की ओर से है। फिर जब तुम्हे कोई तकलीफ़ पहुँचती है, तो तुम उसी से फ़रियाद करते हो
19551654ثم إذا كشف الضر عنكم إذا فريق منكم بربهم يشركون
फिर जब वह उस तकलीफ़ को तुमसे टाल देता है, तो क्या देखते है कि तुममें से कुछ लोग अपने रब के साथ साझीदार ठहराने लगते है,
19561655ليكفروا بما آتيناهم فتمتعوا فسوف تعلمون
कि परिणामस्वरूप जो कुछ हमने उन्हें दिया है उसके प्रति कृतघ्नता दिखलाएँ। अच्छा, कुछ मज़े ले लो, शीघ्र ही तुम्हें मालूम हो जाएगा
19571656ويجعلون لما لا يعلمون نصيبا مما رزقناهم تالله لتسألن عما كنتم تفترون
हमने उन्हें जो आजीविका प्रदान की है उसमें वे उसका हिस्सा लगाते है जिन्हें वे जानते भी नहीं। अल्लाह की सौगंध! तुम जो झूठ घड़ते हो उसके विषय में तुमसे अवश्य पूछा जाएगा


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