بسم الله الرحمن الرحيم

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17371330كذلك أرسلناك في أمة قد خلت من قبلها أمم لتتلو عليهم الذي أوحينا إليك وهم يكفرون بالرحمن قل هو ربي لا إله إلا هو عليه توكلت وإليه متاب
अतएव हमने तुम्हें एक ऐसे समुदाय में भेजा है जिससे पहले कितने ही समुदाय गुज़र चुके है, ताकि हमने तुम्हारी ओर जो प्रकाशना की है, उसे उनको सुना दो, यद्यपि वे रहमान के साथ इनकार की नीति अपनाए हुए है। कह दो, "वही मेरा रब है। उसके सिवा कोई पूज्य-प्रभु नहीं। उसी पर मेरा भरोसा है और उसी की ओर मुझे पलटकर जाना है।"
17381331ولو أن قرآنا سيرت به الجبال أو قطعت به الأرض أو كلم به الموتى بل لله الأمر جميعا أفلم ييأس الذين آمنوا أن لو يشاء الله لهدى الناس جميعا ولا يزال الذين كفروا تصيبهم بما صنعوا قارعة أو تحل قريبا من دارهم حتى يأتي وعد الله إن الله لا يخلف الميعاد
और यदि कोई ऐसा क़ुरआन होता जिसके द्वारा पहाड़ चलने लगते या उससे धरती खंड-खंड हो जाती या उसके द्वारा मुर्दे बोलने लगते (तब भी वे लोग ईमान न लाते) । नहीं, बल्कि बात यह है कि सारे काम अल्लाह ही के अधिकार में है। फिर क्या जो लोग ईमान लाए है वे यह जानकर निराश नहीं हुए कि यदि अल्लाह चाहता तो सारे ही मनुष्यों को सीधे मार्ग पर लगा देता? और इनकार करनेवालों पर तो उनकी करतूतों के बदले में कोई न कोई आपदा निरंतर आती ही रहेगी, या उनके घर के निकट ही कहीं उतरती रहेगी, यहाँ तक कि अल्लाह का वादा आ पूरा होगा। निस्संदेह अल्लाह अपने वादे के विरुद्ध नहीं जाता।"
17391332ولقد استهزئ برسل من قبلك فأمليت للذين كفروا ثم أخذتهم فكيف كان عقاب
तुमसे पहले भी कितने ही रसूलों का उपहास किया जा चुका है, किन्तु मैंने इनकार करनेवालों को मुहलत दी। फिर अंततः मैंने उन्हें पकड़ लिया, फिर कैसी रही मेरी सज़ा?
17401333أفمن هو قائم على كل نفس بما كسبت وجعلوا لله شركاء قل سموهم أم تنبئونه بما لا يعلم في الأرض أم بظاهر من القول بل زين للذين كفروا مكرهم وصدوا عن السبيل ومن يضلل الله فما له من هاد
भला वह (अल्लाह) जो प्रत्येक व्यक्ति के सिर पर, उसकी कमाई पर निगाह रखते हुए खड़ा है (उसके समान कोई दूसरा हो सकता है)? फिर भी लोगों ने अल्लाह के सहभागी-ठहरा रखे है। कहो, "तनिक उनके नाम तो लो! (क्या तुम्हारे पास उनके पक्ष में कोई प्रमाण है?) या ऐसा है कि तुम उसे ऐसी बात की ख़बर दे रहे हो, जिसके अस्तित्व की उसे धरती भर में ख़बर नहीं? या यूँ ही यह एक ऊपरी बात ही बात है?" नहीं, बल्कि इनकार करनेवालों को उनकी मक्कारी ही सुहावनी लगती है और वे मार्ग से रुक गए है। जिसे अल्लाह ही गुमराही में छोड़ दे, उसे कोई मार्ग पर लानेवाला नहीं
17411334لهم عذاب في الحياة الدنيا ولعذاب الآخرة أشق وما لهم من الله من واق
उनके लिए सांसारिक जीवन में भी यातना, तो वह अत्यन्त कठोर है। औऱ कोई भी तो नहीं जो उन्हें अल्लाह से बचानेवाला हो
17421335مثل الجنة التي وعد المتقون تجري من تحتها الأنهار أكلها دائم وظلها تلك عقبى الذين اتقوا وعقبى الكافرين النار
डर रखनेवालों के लिए जिस जन्नत का वादा है उसकी शान यह है कि उसके नीचे नहरें बह रही है, उसके फल शाश्वत है और इसी प्रकार उसकी छाया भी। यह परिणाम है उनका जो डर रखते है, जबकि इनकार करनेवालों का परिणाम आग है
17431336والذين آتيناهم الكتاب يفرحون بما أنزل إليك ومن الأحزاب من ينكر بعضه قل إنما أمرت أن أعبد الله ولا أشرك به إليه أدعو وإليه مآب
जिन लोगों को हमने किताब प्रदान की है वे उससे, जो तुम्हारी ओर उतारा है, हर्षित होते है और विभिन्न गिरोहों के कुछ लोग ऐसे भी है जो उसकी कुछ बातों का इनकार करते है। कह दो, "मुझे पर बस यह आदेश हुआ है कि मैं अल्लाह की बन्दगी करूँ और उसका सहभागी न ठहराऊँ। मैं उसी की ओर बुलाता हूँ और उसी की ओर मुझे लौटकर जाना है।"
17441337وكذلك أنزلناه حكما عربيا ولئن اتبعت أهواءهم بعدما جاءك من العلم ما لك من الله من ولي ولا واق
और इसी प्रकार हमने इस (क़ुरआन) को एक अरबी फ़रमान के रूप में उतारा है। अब यदि तुम उस ज्ञान के पश्चात भी, जो तुम्हारे पास आ चुका है, उनकी इच्छाओं के पीछे चले तो अल्लाह के मुक़ाबले में न तो तुम्हारा कोई सहायक मित्र होगा और न कोई बचानेवाला
17451338ولقد أرسلنا رسلا من قبلك وجعلنا لهم أزواجا وذرية وما كان لرسول أن يأتي بآية إلا بإذن الله لكل أجل كتاب
तुमसे पहले भी हम, कितने ही रसूल भेज चुके है और हमने उन्हें पत्नियों और बच्चे भी दिए थे, और किसी रसूल को यह अधिकार नहीं था कि वह अल्लाह की अनुमति के बिना कोई निशानी स्वयं ला लेता। हर चीज़ के एक समय जो अटल लिखित है
17461339يمحو الله ما يشاء ويثبت وعنده أم الكتاب
अल्लाह जो कुछ चाहता है मिटा देता है। इसी तरह वह क़ायम भी रखता है। मूल किताब तो स्वयं उसी के पास है


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